Friday, January 30, 2009


@@छुपते छुपाते सुरीले सुर .....!!!

सुना है 
बरसो 
गुनगुनाना आप.का 

सोचा है..
बार बार 
कह दू आपको ..
सुरीला है 
जैसे 
हँसी हो मेरी ..और दो बातें हमारी !!

गुनगुने गीत है 
किरणे सुबह की और रात में है पिघलती सरदी !!!

गाने जो सुनती है 
मेज्ज,बिस्तर,और खिड़की आपकी 
कहदे भला ...
खता क्या हमारी???

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