@मांगे है..!
हर फज्ज़ा धुन की लकीर ,
हर ज़र्रा पहचान की बूंद ,
दिल वोह गुलाब है ,जो ख़ुद अपना लाल मांगे है...!
हर कतरे में जवानी ,
हर शाख रूमानी ,
उल्जी मेरी हर जुल्फ और खमीदा पलकें ,तेरी तावौज्जोह मांगे है..!
हर निगाह इजहार
लबों के कोने इकरार ,
तू ही है चाँद मेरा ,फिर भी जिंदगी तारों के संग पुरा फलक मांगे है ...!
अब न सिर्फ़ आंखे कहे कुछ
साँसे मेरी हर दुहाई तुम्हारी जुबानी मांगे है....!
यकीं नही तो ...
देख लो ज़माने भर को ....
हर बदन और भी कुछ तंग काबा मांगे है......!!!
एक खुदा और मांगे है........
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