@
@आदतें ......
आदत तो है
साथ सफर की ..
साथ चलने की..
अगर सफर के सामान ही अलग हो तो?
है आदत ....
बिना पूछे चिन्नी मिलाने की ..
लेकिन चाय ही बिना-शक्कर्र की हो तो?
आदत तो है
तकिये तल्ले ख्वाब जलाने की...
रात ,जब किसीका दिन हो तो?
आदत तो है ...
बिना बोले कुछ कहने की.....
जब खामोशी ही वजह हो तो?
अस्सल में हमें आदत बदलने की आदत ही नही..........
आदत तो है
साथ सफर की ..
साथ चलने की..
अगर सफर के सामान ही अलग हो तो?
है आदत ....
बिना पूछे चिन्नी मिलाने की ..
लेकिन चाय ही बिना-शक्कर्र की हो तो?
आदत तो है
तकिये तल्ले ख्वाब जलाने की...
रात ,जब किसीका दिन हो तो?
आदत तो है ...
बिना बोले कुछ कहने की.....
जब खामोशी ही वजह हो तो?
अस्सल में हमें आदत बदलने की आदत ही नही..........

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